यूटीआई मिडकैप म्‍यूचुअल फंड में फंड मैनेजर के बदलाव के बाद अच्‍छा रिटर्न देखने को मिला है. पिछले एक साल में इस फंड का रिटर्न करीब 80 फीसदी तक का है. हालांकि, बीते कुछ सालों में यह कैटेगरी औसत से पीछे रहा है.

भूल जाए एफडी! यहां एक साल में मिला 80 फीसदी मुनाफा, अब सबसे तेज होंगे पैसे डबल

सांकेतिक तस्‍वीर

इक्विटी म्‍यूचुअल फंड्स के लिए पिछला साल बेहद शानदार साबित हुआ है. ऐसे कई फंड्स का प्रदर्शन 60 या 80 फीसदी से भी ज्‍यादा देखने को मिली है. यूटीआई मिडकैप फंड भी इन्‍हीं में से एक है, जिनमें बीते एक साल में 80 फीसदी तक का रिटर्न दिया है. बीते एक साल की अवधि में देखें तो यह फंड अपनी कैटेगरी में सबसे बेस्‍ट परफॉर्मेंस में से एक साबित हुआ है. हालांकि, बीते कुछ सालों की बात करें तो यह कैटेगरी औसत से पीछे रहा है.

यूटीआई मिडकैप म्‍यूचुअल फंड मिडकैप में तो निवेश करता ही है, इसके अलावा इसका फोकस स्‍मॉल और लार्ज कैप्‍स पर भी है. इस फंड में मिडकैप की हिस्‍सेदारी 74.36 फीसदी है. इसके अलावा लार्ज कैप की हिस्‍सेदारी 13.42 फीसदी और स्‍मॉलकैप क‍ी हिस्‍सेदारी 12.12 फीसदी है.

यूटीआई मिडकैप म्‍यूचुअल फंड 4 जुलाई 2004 को लॉन्‍च हुआ था. इक्विटी कैटेगरी के इस फंड का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 5.205 करोड़ रुपये है. एग्जिट लोड की बात करें तो 364 दिन के अंदर यह 1 फीसदी के करीब है.

इस पोर्टफोलियो में हालिया क्‍या बदलाव हुए हैं?

इस फंड में आशेक लेलैंड, ग्रिंडवेल नॉर्टन, पीएनसी इन्‍फ्राटेक, शेफलेर इंडिया, कोफोर्ज, क्रेडिटएक्‍ससेस ग्रामीण, श्रीराम ट्रांसपोर्ट को शामिल किया गया है. जबकि, चम्‍बल फर्टीलाइजर्स एंड केमिकल्‍स, इंद्रप्रस्‍थ गैस, ज्‍योतिलैब्‍स, राणे होल्डिंग्‍स, टोरेंट पावर, मल्‍टी कमोडिटी एक्‍सचेंज इंडिया को निकाला गया है.

इस पोर्टफोलियो में टॉप 5 सेक्‍टर्स कौन से हैं?

सेक्‍टर्सहिस्‍सेदारी (फीसदी)
हेल्‍थकेयर11.23
फाइनेंशियल17.17
ऑटोमोबाइल्‍स11.23
केमिकल्‍स10.54
सर्विसेज9.23

इस पोर्टफोलियो में टॉप 5 स्‍टॉक्‍स कौन से हैं?

स्‍टॉक्‍सहिस्‍सेदारी (फीसदी)
चोलामण्‍डलम इन्‍वेस्‍ट & फाइनेंस4.05
एसआरएफ3.43
पीआई इंडस्‍ट्रीज3.30
जुबिलांट फूडवर्क्‍स3.00
ट्यूब इन्‍वेस्‍टमेंट ऑफ इंडिया2.99

 आपको खरीदना चाहिए या नहीं?

मिडकैप फंड में ग्रोथ और वैल्‍यू मिश्रित संतुलन होता है. ये फंड्स कई तरह के बिजनेस के अलावा उन बिजनेस पर भी खास ध्‍यान देते हैं, जिनमें आगे फैलावा गुंजाईश है. साथ ही यह बदलाव के दौरा से गुजर रही कंपनियों में भी निवेश करते हैं. इस प्रकार आप देखेंगे कि इन कंपनियों के पोर्टफोलियो बहुत डाईवर्सिफाईड होते हैं. बीते कुछ सालों में इस तरह के फंड्स का परफॉर्मेंस कुछ खास नहीं रहा है. लेकिन नये फंड मैनेजर ने छोटी अवधि में अच्‍छा रिटर्न दिया है. ऐसे में अब उम्‍मीद है कि आने वाले सालों में इनके परफॉर्मेंस में और भी सुधार होगा.