अनुलोम- विलोम
अनुलोम- विलोम - फोटो : Social Media
इन दिनों बहुत जरूरी है कि हम सभी यदि अपने घर से बाहर आते- जाते न हो, तब भी हम अनुलोम-विलोम का अभ्यास जरूर करें। अनुलोम-विलोम करना बहुत अधिक कठिन भी नहीं है और इसके फायदे बहुत सारे हैं। कोरोना से खुद को सुरक्षित रखने के लिए इसका प्रयास बहुत आवश्यक है और यदि कोरोना के बाद भी किसी व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है, तब भी इसका अभ्यास अवश्य करें। आइए जानते हैं इसे सही ढंग से करने का तरीका एवं होने वाले लाभ।

अनुलोम-विलोम ऐसे करें- 
सबसे पहले तो अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा करके बैठ जाएं। अपने बाएँ हाथ को बाएँ घुटने पर रखें, हथेली को ऊपर की ओर रखें। अब अपनी दोनों भौहों के बीच में तर्जनी और मध्यमा को रखें। साथ ही अनामिका और सबसे छोटे ऊंगली को अपने बाएं नथुने पर और अंगूठे को दाहिनी नासिका पर रखें। अब अनामिका और छोटी उंगली का इस्तेमाल करके अपनी बाईं नासिका को खोलने और बंद करने की कोशिश करें। अंगूठे से बाईं नासिका को बंद करके दाईं नासिका से सांस छोड़ें। अब यही प्रक्रिया अब दाईं नासिका से दोहराएं। एक नासिका को खुला छोड़कर उससे सांस लिजिए और दूसरी से सांस छोड़िए। इस तरह 8-10 बार करें। अपनी आंखें पूरी तरह से बंद रखें। 

लाभ-
  • सांस लेने में आने वाली कठिनाइयां दूर होती हैं। 
  • यदि एक जगह ध्यान नहीं लग पाता है तो इस प्राणायाम का अभ्यास एकाग्रता लाने में सहायता करता है।
  • तनाव को दूर भगाने में मदद करता है।
  • हमारी भावनाओं और विचारों को संतुलित करने में लाभदायक है। 
  • रक्त में ऑक्सीजन लेवल को कम नहीं होने देता है।  
  • नाड़ियों की शुद्धि करता है और उनको स्थिर करता है।
  • जिन लोगों को बहुत अधिक सोचने की आदत है, उनके मन को वर्तमान में रखने का प्रयास करता है। 

 इन बातों का रखें ध्यान-
उंगलियों को नाक पर हल्के से रखें, बहुत अधिक दबाव न दें। आराम से सांस लें। सांस लेने में नाक का प्रयोग करें। मुंह से सांस न लें। ध्यान रखें कि सांस छोड़ने का समय साँस लेने से अधिक लंबा हो और धीरे से सांस को बाहर छोड़ें।